नई दिल्ली: देश के करोड़ों किसानों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय कैबिनेट ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने को मंजूरी दे दी है। अब यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से लेकर 2030-31 तक लागू रहेगी। सरकार ने इस अवधि के लिए 3.15 लाख करोड़ रुपये से अधिक के बजट को भी स्वीकृति दी है, जिससे पात्र किसानों को पहले की तरह नियमित आर्थिक सहायता मिलती रहेगी।
हर साल मिलते रहेंगे 6,000 रुपये
पीएम किसान योजना के तहत पात्र किसान परिवारों को हर वर्ष 6,000 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है। यह राशि 2,000 रुपये की तीन समान किस्तों में सीधे किसानों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से भेजी जाती है। सरकार के अनुसार, किस्तों का समय फसल चक्र को ध्यान में रखकर तय किया जाता है, ताकि बुवाई और खेती की तैयारी के दौरान किसानों को समय पर आर्थिक मदद मिल सके।
पांच साल में 3.15 लाख करोड़ रुपये होंगे खर्च
सरकार ने योजना को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने के लिए 3,15,614 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव रखा है। सरकार का मानना है कि इससे किसानों को नियमित आय का सहारा मिलता रहेगा और खेती से जुड़े आवश्यक खर्चों को पूरा करने में सुविधा होगी। साथ ही उनकी आर्थिक स्थिति को भी मजबूती मिलेगी।
खेती के जरूरी खर्च पूरे करने में मिलेगी मदद
सरकार का कहना है कि योजना की किस्तें ऐसे समय जारी की जाती हैं, जब किसानों को बीज, खाद, कीटनाशक और अन्य कृषि सामग्री खरीदने के लिए सबसे अधिक धन की आवश्यकता होती है। इससे नकदी की कमी की समस्या कम होती है और किसानों की महंगे ब्याज पर कर्ज लेने की जरूरत भी घटती है।
छोटे और सीमांत किसानों को सबसे ज्यादा लाभ
सरकार के मुताबिक, पीएम किसान योजना का सबसे अधिक लाभ छोटे और सीमांत किसानों को मिला है। अब तक योजना की 23 किस्तों के माध्यम से 4.47 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जा चुकी है। नीति आयोग के आकलन के अनुसार, इस योजना से बड़ी संख्या में किसानों की आय में सुधार हुआ है और उनकी अनौपचारिक कर्ज पर निर्भरता भी कम हुई है।
